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संभोग के समय खुद को देखते रहने की आदत: इसका क्या असर होता है?

Dr Kanhaiya Kachhawa

Dr Kanhaiya KachhawaMBBS, MD (Psychiatry), Psychiatrist, Bikanerसमीक्षा: 2 नवंबर 2026

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संक्षेप में

संभोग के समय अगर ध्यान अनुभव के बजाय इस पर रहे कि शरीर ठीक से काम कर रहा है या नहीं, तो मन में टकराव और दबाव बन सकता है। इसका असर शीघ्रपतन और तनाव की समस्या पर पड़ सकता है। ध्यान को स्पर्श की अनुभूति पर लाने का अभ्यास इस आदत को बदलने में मदद कर सकता है।

यह आदत कैसी होती है?

कई लोग पार्टनर को छूते या गले लगाते समय मन ही मन देखते रहते हैं: "मैंने छुआ, फिर भी कुछ हलचल क्यों नहीं हो रही?" या "अभी जल्दी डिस्चार्ज हो जाएगा।" वे अनुभव में होने के बजाय खुद के दर्शक बन जाते हैं।

इसका असर कैसे पड़ता है?

दिमाग में एक साथ दो काम चलते हैं: यौन क्रिया और उसकी निगरानी। इससे टकराव बनता है और ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम का सिम्पेथेटिक हिस्सा ज़्यादा सक्रिय हो सकता है।

निगरानी का चक्र
  1. शरीर पर निगरानी
  2. मन में टकराव और दबाव
  3. स्खलन या तनाव की समस्या
  4. और ज़्यादा निगरानी

यह आदत कैसे बदलें?

यह एक दिन में नहीं बदलती, क्योंकि यह आदत बन चुकी होती है। इसे धीरे-धीरे अभ्यास से बदला जाता है।

स्पर्श पर ध्यान ले जाने की एक्सरसाइज़

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