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दवा से आराम मिला, पर तकलीफ़ लौट आती है? दवा और CBT की भूमिका

Dr Kanhaiya Kachhawa

Dr Kanhaiya KachhawaMBBS, MD (Psychiatry), Psychiatrist, Bikanerसमीक्षा: 1 नवंबर 2026

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संक्षेप में

दवा लक्षणों में राहत दे सकती है। अगर नेगेटिव सोच के पैटर्न वैसे ही रहें, तो किसी नई घटना पर तकलीफ़ लौट सकती है। इसलिए कई लोगों के लिए इलाज के साथ CBT का अभ्यास उपयोगी होता है। दवा अचानक बंद न करें। कोई भी बदलाव डॉक्टर की देखरेख में ही करें।

समस्या के तीन हिस्से

नेगेटिव विचार से लक्षणों तक
  1. ऑटोमैटिक नेगेटिव विचार
  2. दिमाग के रसायनों में गड़बड़ी
  3. मन, शरीर और व्यवहार के लक्षण

जैसे किसी ने फ़ोन नहीं उठाया, तो मन में आया: वह मुझे अनदेखा कर रहा है। ऐसे निष्कर्ष बार-बार बनते हैं।

दवा क्या करती है?

SSRI जैसी दवाएँ दिमाग के रसायनों पर काम करके लक्षणों में राहत दे सकती हैं। डिप्रेशन और एंग्ज़ायटी के कई लोगों के लिए ये इलाज का ज़रूरी हिस्सा होती हैं।

तकलीफ़ क्यों लौट सकती है?

कई लोग बताते हैं कि दवा से कुछ महीने आराम मिला और बाद में तकलीफ़ लौट आई। इसका एक कारण यह हो सकता है कि नेगेटिव सोच का पैटर्न अभी बदला नहीं है। जैसे फ़ोन का सॉफ़्टवेयर समय-समय पर अपडेट करना पड़ता है, वैसे ही सोच के पैटर्न को भी बदलने का अभ्यास करना पड़ता है।

CBT में क्या करते हैं?

रोज़ के जीवन में जब भी नेगेटिव विचार आए, उसे पहचानें और उसका सबूत देखें। इससे धीरे-धीरे सोच का ढंग बदलता है। इसमें अक्सर 4 से 6 महीने या अधिक समय लग सकता है। थोड़ा आराम मिलने पर अभ्यास न छोड़ें।

इस विषय पर वीडियो

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आगे क्या करें?

  • CBT को चरण-दर-चरण सीखें: CBT Course
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