अचानक धड़कन तेज़ हो जाए तो क्या करें?

Dr Kanhaiya KachhawaMBBS, MD (Psychiatry), Psychiatrist, Bikanerसमीक्षा: 31 अक्टूबर 2026
संक्षेप में
अगर डॉक्टर की जाँच में हार्ट की समस्या नहीं मिली है, तो अचानक तेज़ धड़कन का संबंध एंग्ज़ायटी से हो सकता है। उस समय लंबी और गहरी साँस का अभ्यास शरीर को शांत करने में मदद कर सकता है। लंबे समय के लिए डर के पैटर्न पर CBT से काम करना ज़रूरी है।
धड़कन तेज़ होने पर इतना डर क्यों लगता है?
कई लोगों की धड़कन अचानक बढ़ जाती है। सीने में भारीपन लगता है, पसीना आता है और रात में धड़कन कानों तक सुनाई देने लगती है। ऐसे में मन में डर आता है कि कहीं हार्ट में कोई समस्या तो नहीं।
एंग्ज़ायटी में धड़कन क्यों बढ़ती है?
हार्ट की गति ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम से नियंत्रित होती है। एंग्ज़ायटी में इसका सिम्पेथेटिक हिस्सा ज़्यादा सक्रिय हो जाता है, इसलिए हार्ट तेज़ धड़कने लगता है।
इसे पानी की मोटर से समझ सकते हैं। करंट बढ़ने पर मोटर तेज़ चलती है, पर इसका मतलब यह नहीं कि मोटर खराब है। जाँच नॉर्मल होने पर तेज़ धड़कन में भी कई बार कारण नर्वस सिस्टम का अधिक सक्रिय होना होता है।
- नेगेटिव विचार या डर
- नर्वस सिस्टम की अधिक सक्रियता
- धड़कन तेज़ होना
- धड़कन महसूस होने पर और घबराहट
यह घबराहट नर्वस सिस्टम को फिर सक्रिय करती है, और चक्र चलता रहता है।
कौन-से संकेत एंग्ज़ायटी की ओर इशारा करते हैं?
डॉक्टर की जाँच के बाद, ये बातें अपने लक्षणों का पैटर्न समझने में मदद कर सकती हैं:
- ECG जैसी जाँच नॉर्मल आई है।
- धड़कन लगातार तेज़ नहीं रहती, बीच-बीच में बढ़कर नॉर्मल हो जाती है।
- काम में व्यस्त रहने पर कम और खाली बैठने पर ज़्यादा महसूस होती है।
- नेगेटिव बात सुनने, किसी की मृत्यु या बीमारी की खबर, या भविष्य की चिंता के बाद बढ़ती है।
उस समय क्या करें?
जाँच हो चुकी है और डॉक्टर ने हार्ट की समस्या से इनकार किया है, तो घबराहट के समय यह अभ्यास कर सकते हैं। आप जिस स्थिति में आराम से हों, खड़े, बैठे या लेटे, उसी में इसे करें।
- शरीर को ढीला छोड़ें
- धीरे-धीरे लंबी और गहरी साँस लें
- मन ही मन पाँच तक गिनें
- साँस को धीरे-धीरे छोड़ें
इसे 10 से 15 मिनट करें। अपनी क्षमता के अनुसार करें, ज़बरदस्ती साँस न रोकें।
साँस छोड़ते समय मन में कह सकते हैं: "मैं शांत हूँ। मैं स्वस्थ हूँ।" इससे शरीर का पैरासिम्पेथेटिक हिस्सा सक्रिय होने में मदद मिल सकती है, जो शरीर को शांत करता है।
जब दिमाग कुछ समझ न पाए
बहुत तेज़ घबराहट में तर्क काम नहीं करता। तब विचारों से लड़ें नहीं। अपना ध्यान आसपास की हवा, तापमान, आवाज़ों और रंगों पर ले जाएँ। इसे mindfulness कहते हैं।
बार-बार होने पर क्या करें?
breathing से उस समय आराम मिल सकता है, पर डर का पैटर्न अभ्यास से बदलता है। CBT में हम विचार को पहचानते हैं और उसका सबूत देखते हैं। जब मन कहे "मेरे हार्ट में कुछ गड़बड़ है", तो अपनी जाँच और डॉक्टर की राय को याद करें। अगर ECG बार-बार नॉर्मल आ चुका है, तो उसी डर के कारण बार-बार नई जाँच करवाने की ज़रूरत नहीं है।
नियमित अभ्यास के लिए सुबह और शाम 15 से 20 मिनट का समय तय कर सकते हैं।
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आगे क्या करें?
- CBT को चरण-दर-चरण सीखें: CBT Course
- रोज़ का अभ्यास करें: CBT Tools App (Android | iPhone)
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