घबराहट में साँस क्यों फूलती है?

Dr Kanhaiya KachhawaMBBS, MD (Psychiatry), Psychiatrist, Bikanerसमीक्षा: 31 अक्टूबर 2026
संक्षेप में
साँस की तकलीफ़ के कई कारण हो सकते हैं, इसलिए पहले डॉक्टर से जाँच ज़रूरी है। अगर जाँच नॉर्मल है और तकलीफ़ बीच-बीच में तनाव या खाली बैठने पर होती है, तो इसका संबंध एंग्ज़ायटी से हो सकता है। उस समय breathing exercise और लंबे समय के लिए CBT मदद कर सकती है।
यह तकलीफ़ कैसी महसूस होती है?
- साँस खींचकर लेनी पड़ती है, फिर भी पूरी नहीं लगती।
- बार-बार उबासी आती है या मुँह खोलकर साँस लेनी पड़ती है।
- सीने में भारीपन और घुटन लगती है।
- लगता है जैसे आसपास की हवा में ऑक्सीजन कम हो गई है।
कई लोगों को यह 15-20 मिनट के लिए बहुत तेज़ लगती है और फिर सब सामान्य हो जाता है। आसपास के लोग इसे नाटक समझ सकते हैं, पर व्यक्ति को यह तकलीफ़ सच में महसूस होती है।
एंग्ज़ायटी का साँस से क्या संबंध है?
साँस लेना अपने आप चलता रहता है, और इसे ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम नियंत्रित करता है। यह सिस्टम हमारी भावनाओं वाले हिस्से, लिंबिक सिस्टम, से जुड़ा है।
- नेगेटिव विचार
- लिंबिक सिस्टम में डर की भावना
- ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम की अधिक सक्रियता
- साँस तेज़ होना और सीने की मांसपेशियों का थकना
- साँस खींचकर लेने का एहसास
सीने की मांसपेशियाँ थकने पर साँस लेना मुश्किल लगता है, जिससे घबराहट और बढ़ सकती है।
कौन-से संकेत एंग्ज़ायटी की ओर इशारा करते हैं?
डॉक्टर की जाँच के बाद, ये बातें अपने लक्षणों का पैटर्न समझने में मदद कर सकती हैं:
- तकलीफ़ लगातार नहीं, बीच-बीच में होती है।
- व्यस्त रहने या पसंद की बात करते समय कम हो जाती है, खाली बैठने पर बढ़ती है।
- ऑक्सीजन सैचुरेशन और दूसरी जाँच बार-बार नॉर्मल आती है।
- नेगेटिव बात, डाँट या किसी की बीमारी की खबर सुनने के बाद शुरू होती है।
- साथ में ओवरथिंकिंग रहती है और दिमाग शांत नहीं हो पाता।
उस समय क्या करें?
जाँच के बाद एंग्ज़ायटी से जुड़ी तकलीफ़ में ये तरीके आराम दे सकते हैं:
- आराम से बैठें और शरीर ढीला छोड़ें
- धीरे-धीरे लंबी और गहरी साँस लें
- मन ही मन पाँच तक गिनें
- धीरे-धीरे साँस छोड़ें
साँस छोड़ते समय मन में कहें: मैं शांत हूँ। इसे 15 से 20 मिनट करें।
- ध्यान बदलें: ध्यान को साँस से हटाकर किसी और काम पर ले जाएँ, जैसे उलटी गिनती गिनना।
- योग और मेडिटेशन: नियमित अभ्यास से एंग्ज़ायटी का स्तर कम हो सकता है।
- दवा: ज़रूरत होने पर मनोचिकित्सक थोड़े समय के लिए दवा दे सकते हैं। इसे अपने आप शुरू न करें।
लंबे समय के लिए क्या करें?
जीवन में नेगेटिव बातें पूरी तरह रोकना संभव नहीं है। इसलिए बदलाव इस बात में करना होता है कि हमारा दिमाग उन पर कैसे प्रतिक्रिया देता है। दिमाग में अपने पैटर्न बदलने की क्षमता होती है, जिसे न्यूरोप्लास्टिसिटी कहते हैं।
CBT में गलत विचार की जगह सही और वास्तविक जानकारी का बार-बार अभ्यास किया जाता है। इसमें अक्सर 4 से 6 महीने या उससे अधिक समय लग सकता है, इसलिए लगातार अभ्यास ज़रूरी है।
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आगे क्या करें?
- CBT को चरण-दर-चरण सीखें: CBT Course
- रोज़ का अभ्यास करें: CBT Tools App (Android | iPhone)
- Mind Tonic: DrK Naturals Mind Tonics
- Dr. Kanhaiya से परामर्श लें: अपॉइंटमेंट के लिए 7737775617 पर कॉल करें।


