बार-बार चक्कर आना: कारण, जाँच और इलाज

Dr Kanhaiya KachhawaMBBS, MD (Psychiatry), Psychiatrist, Bikanerसमीक्षा: 31 अक्टूबर 2026
संक्षेप में
चक्कर के कई कारण हो सकते हैं, जैसे शुगर या BP कम होना, विटामिन की कमी, पानी की कमी, कान या सर्वाइकल की समस्या। इलाज कारण के अनुसार होता है, इसलिए पहले जाँच ज़रूरी है। अगर जाँच नॉर्मल है और चक्कर के साथ डर और ओवरथिंकिंग रहती है, तो इसका संबंध एंग्ज़ायटी से हो सकता है।
चक्कर में क्या महसूस होता है?
- सिर या आसपास की चीज़ें घूमती हुई लगती हैं।
- अक्षर धुंधले या दो-दो दिखते हैं।
- सिर भारी लगता है और गिरने का डर रहता है।
- जी मिचलाता है या एसिडिटी जैसा लगता है।
चक्कर के आम कारण
- शुगर कम होना: शरीर को मिलने वाली ऊर्जा कम हो जाती है।
- BP कम होना: शरीर के अंगों तक खून की आपूर्ति प्रभावित होती है।
- विटामिन या खनिज की कमी: जैसे विटामिन B12, विटामिन D या कैल्शियम।
- पानी की कमी: गर्मी या ज़्यादा पसीने से हो सकती है।
- कान की समस्या: कान शरीर का संतुलन बनाए रखने में भी काम करते हैं।
- सर्वाइकल: गर्दन की नसों पर दबाव से भी चक्कर आ सकते हैं।
- दिमाग से जुड़ी समस्या: जैसे चोट या बनावट से जुड़ी कोई समस्या।
- थायरॉइड: मेटाबॉलिज़्म पर असर से ऊर्जा कम हो सकती है।
- तनाव और एंग्ज़ायटी: लंबे समय के तनाव में भी चक्कर आम लक्षण हो सकता है।
कौन-सी जाँच मदद करती है?
आपके लक्षण देखकर डॉक्टर तय करते हैं कि कौन-सी जाँच ज़रूरी है। इनमें ब्लड शुगर, BP, विटामिन B12, विटामिन D, कैल्शियम और थायरॉइड की जाँच, कान की जाँच, और ज़रूरत पड़ने पर CT स्कैन या MRI शामिल हो सकते हैं।
इलाज कारण के अनुसार होता है
शुगर या BP कम हो, विटामिन की कमी हो, या कान या सर्वाइकल की समस्या हो, तो इलाज उसी कारण पर केंद्रित होता है। कान के लिए कान के विशेषज्ञ से, और गर्दन की नसों की समस्या के लिए संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें। दवा या सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह से लें।
जाँच नॉर्मल है, फिर भी चक्कर क्यों?
अगर जाँच नॉर्मल है और चक्कर नेगेटिव बात सुनने, डर या ओवरथिंकिंग के साथ बढ़ते हैं, तो इनका संबंध एंग्ज़ायटी से हो सकता है। एंग्ज़ायटी में ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम के अधिक सक्रिय होने से शरीर पर अपना नियंत्रण कम होने जैसा महसूस हो सकता है।
एक व्यक्ति के करीबी दोस्त की अचानक मृत्यु हो गई। उसके बाद एक दिन हल्का चक्कर आने पर उन्हें लगा कि उन्हें भी कुछ हो जाएगा। धीरे-धीरे वे अकेले बाहर जाना, काम और कार्यक्रम छोड़ने लगे, और डर 2-3 साल तक बना रहा।
- हल्का चक्कर
- विचार: मुझे कोई गंभीर बीमारी है
- बाहर जाना और काम छोड़ना
- डर का और मज़बूत होना
जिन जगहों से हम बचते हैं, उनका डर अक्सर और बढ़ जाता है।
CBT में क्या करते हैं?
1. विचार का सबूत देखें
जब मन कहे "मुझे कोई गंभीर बीमारी है", तो पूछें: "इसका सबूत क्या है? मेरी जाँच और डॉक्टर की राय क्या कहती है?" सही जानकारी खुद को बार-बार बताएँ, क्योंकि मन को नई बात स्वीकार करने में समय लगता है।
2. धीरे-धीरे उन जगहों पर लौटें
डॉक्टर की जाँच के बाद, धीरे-धीरे काम, दुकान और कार्यक्रमों में वापस जाना शुरू करें। शुरुआत में थोड़ी घबराहट हो सकती है। जैसे-जैसे आप लौटते हैं, मन को समझ आने लगता है कि वह जगह सुरक्षित है।
3. अभ्यास जारी रखें
बहुत ज़्यादा एंग्ज़ायटी में डॉक्टर थोड़े समय के लिए दवा भी दे सकते हैं, और योग व मेडिटेशन भी मदद करते हैं। पैटर्न बदलने के लिए CBT का लगातार अभ्यास ज़रूरी है, जिसमें कई महीने लग सकते हैं।
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आगे क्या करें?
- CBT को चरण-दर-चरण सीखें: CBT Course
- रोज़ का अभ्यास करें: CBT Tools App (Android | iPhone)
- Mind Tonic: DrK Naturals Mind Tonics
- Dr. Kanhaiya से परामर्श लें: अपॉइंटमेंट के लिए 7737775617 पर कॉल करें।


