जाँच नॉर्मल, फिर भी पेट में गैस और जलन क्यों?

Dr Kanhaiya KachhawaMBBS, MD (Psychiatry), Psychiatrist, Bikanerसमीक्षा: 31 अक्टूबर 2026
संक्षेप में
पेट की तकलीफ़ के शारीरिक कारण भी हो सकते हैं और तनाव से जुड़े कारण भी। इसलिए पहले डॉक्टर की जाँच ज़रूरी है। खाने-पीने की आदतें बदलने से गैस में मदद मिल सकती है। अगर जाँच बार-बार नॉर्मल है और तनाव में तकलीफ़ बढ़ती है, तो दिमाग और पेट के संबंध पर भी काम करना ज़रूरी है।
गैस बनने के 3 बड़े कारण
- खाना ठीक से न पचना: पाचन रसायन या पेट के अच्छे जीवाणुओं का संतुलन बिगड़ने पर खाना पेट में पड़ा रह सकता है।
- पेट में हवा जाना: जल्दी-जल्दी खाने और पीने से या मुँह से साँस लेने से हवा पेट में जाती है।
- आँतों में खिंचाव: मांसपेशियों में ऐंठन होने पर गैस अंदर रुक सकती है और पेट फूला लगता है।
रोज़ की आदतों में क्या बदलें?
- धीरे-धीरे चबाकर खाएँ: इससे हवा कम जाती है, खाना अच्छे से टूटता है और ज़रूरत से ज़्यादा खाने से बचाव होता है।
- धीरे-धीरे पिएँ: पानी, जूस या शरबत एक साथ जल्दी न पिएँ।
- नाक से साँस लें: तनाव में मुँह से साँस लेने पर भी हवा पेट में जा सकती है।
- रोज़ एक कटोरी दही लें: दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स पेट के जीवाणुओं का संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
अदरक और पुदीने का काढ़ा
एक गिलास पानी में अदरक का एक टुकड़ा और 8-10 पुदीने की पत्तियाँ डालकर आधा होने तक उबालें। छानकर थोड़ा ठंडा करें और पिएँ।
कौन-सी जाँच की जाती है?
आपके लक्षण देखकर डॉक्टर सोनोग्राफी, एंडोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी, CT स्कैन या लिवर की जाँच जैसी जाँचें बता सकते हैं। इनसे अल्सर, सूजन, संक्रमण या दूसरी समस्याओं का पता चलता है।
जाँच नॉर्मल होने पर दिमाग की भूमिका
अगर जाँच बार-बार नॉर्मल है और गैस, कब्ज़, दस्त, जलन या मरोड़ बनी रहती है, तो तनाव और ओवरथिंकिंग की भूमिका भी देखनी चाहिए। दिमाग और पेट आपस में जुड़े हैं। आपने भी देखा होगा कि नींद पूरी न होने या ज़्यादा तनाव में पेट पर भी असर पड़ता है।
इसे घर के बल्ब से समझ सकते हैं। अगर बल्ब बार-बार बदलने पर भी न जले, तो समस्या बल्ब में नहीं, वायरिंग या मीटर में हो सकती है। इसी तरह, जाँच नॉर्मल होने पर हमें दूसरे कारणों पर भी सोचना पड़ता है।
- ओवरथिंकिंग और नेगेटिव विचार
- तनाव और एंग्ज़ायटी
- ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम पर असर
- पाचन में गड़बड़ी और आँतों में खिंचाव
पेट की तकलीफ़ से चिंता बढ़ती है, और यह चिंता तकलीफ़ को बनाए रख सकती है।
एक व्यक्ति परीक्षा देने ट्रेन से जा रहे थे। उनके मन में विचार आया कि अगर नींद न हुई या समय पर न पहुँचे, तो करियर खराब हो जाएगा। ऐसी ओवरथिंकिंग के साथ उन्हें गैस, कब्ज़, दस्त और एसिडिटी की शिकायत रहने लगी।
क्या करें?
- बार-बार जाँच के चक्र से बाहर आएँ: डॉक्टर ने जाँच करके समस्या से इनकार कर दिया हो, तो सिर्फ़ डर के कारण बार-बार जाँच करवाने से ध्यान पेट पर ही अटका रहता है।
- CBT का अभ्यास करें: नेगेटिव विचारों को पहचानकर और उनका सबूत देखकर पैटर्न बदले जाते हैं। विचारों से लड़ने से वे अक्सर और मज़बूत होते हैं।
- योग और मेडिटेशन करें: ये तनाव कम करने में मदद करते हैं।
- दवा डॉक्टर की सलाह से लें: ज़्यादा तकलीफ़ में डॉक्टर थोड़े समय के लिए दवा दे सकते हैं।
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आगे क्या करें?
- CBT को चरण-दर-चरण सीखें: CBT Course
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- Dr. Kanhaiya से परामर्श लें: अपॉइंटमेंट के लिए 7737775617 पर कॉल करें।



