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हर छोटी बात पर मरने का डर: यह डर कैसे बनता है और क्या करें?

Dr Kanhaiya Kachhawa

Dr Kanhaiya KachhawaMBBS, MD (Psychiatry), Psychiatrist, Bikanerसमीक्षा: 7 नवंबर 2026

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संक्षेप में

मरने का डर अक्सर किसी करीबी की बीमारी या मौत की खबर के बाद शुरू होता है, और फिर शरीर का हर लक्षण उसी डर से जोड़ा जाने लगता है। परेशानी दर्द से कम और उसके बारे में दिमाग में बनी डरावनी तस्वीर से ज़्यादा होती है। जाँच के बाद, खुद से की जाने वाली शक भरी बातों को पहचानकर बदलना मदद कर सकता है।

यह डर कैसे शुरू होता है?

अक्सर किसी करीबी को हार्ट अटैक, कैंसर या अचानक मौत की खबर सुनने के बाद अपनी सेहत पर भरोसा टूट जाता है। एक केस में, 30 वर्षीय व्यक्ति के दो रिश्तेदारों को हार्ट अटैक आया। उसके बाद से उन्हें सीने में ज़रा भी भारीपन होता, तो लगता कि हार्ट अटैक आ रहा है। दिल की जाँचें कई बार नॉर्मल आईं, फिर भी डर नहीं गया।

धीरे-धीरे यह डर काम, परिवार और बातचीत पर भी असर डालने लगता है। ध्यान हर समय उसी डर पर रहता है, और जो चीज़ें पहले अच्छी लगती थीं, उनमें भी मन नहीं लगता।

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